Cow Sanctuary, Research and Production Center Salriya District Agar-Malwa

पृष्ठभूमि

दिनांक 11.01.2008 को माननीय मुख्यमंत्री महोदय द्वारा जिला आगर-मालवा (पहले शाजापुर) गौ-अभ्यारण्य स्थापित किये जाने की घोषणा की गई। जिसके परिपालन में न्यायालय कलेक्टर,जिला शाजापुर(म.प्र) द्वारा आदेश क्रमांक 34/अ- 19(3) /07-08 दिनांक 15.07.2008 से ग्राम सालरिया, तहसील सुसनेर, जिला शाजापुर(अब आगर-मालवा) (म.प्र) मे 472.63 हैक्टेयर भूमि पशुपालन विभाग को आवंटित की गई।

दिनांक 24.12.2012 को इस गौ अभ्यारण्य के भूमि पूजन कार्यक्रम में मा..मुख्यमंत्रीजी ,द्वारा घोषणा की गई कि:-

घोषणा क्रमांक ए2606

‘‘सालरिया गौअभ्यारण्य जिला शाजापुर को गौतीर्थ के रूप में विकसित किया जाएगा।अभ्यारण्य में अनुसंधान केन्द्र प्रारंभ किया जाएगा।‘‘

घोषणा क्रमांक ए2607

‘‘गौमूत्र औषधि निर्माण केन्द्र प्रारंभ किया जाएगा।‘‘

परियोजना के प्रमुख घटक

  1. निःशक्त,लावारिस,दान में व पुलिस अभिरक्षा से प्राप्त गौवंष का वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ पालन।
  2. गौवंश से प्राप्त गोबर-गौमूत्र का प्रबंधन उनसे गोबर गैस व जैविक खाद निर्माण।
  3. पंचगव्य पर शोध उनसे विभिन्न औषधियों एवं उपयोगी पदार्थो का निर्माण एवं उनका विपणन।
  4. हरा चारा एवं चारागाह का माडल स्वरूप विकास।
  5. मृदा व जल संरक्षण का माॅडल।
  6. अभ्यारण्य को ग्रामीण पर्यटन एवं कृषक प्रषिक्षण केन्द्र के रूप में विकसित करना।

भूमि प्रबंधन

1 अनुसंधान एवं उत्पादन इकाई 2.0 हैक्टेयर
2 आवास 1.5 हैक्टेयर
3 कृषक प्रशिक्षण केन्द्र 0.5 हैक्टेयर
4 गौतीर्थ एवं ग्रामीण पर्यटन विकास 10.00 हैक्टेयर
5 चारागाह विकास (चरणबद्ध रूप से) 200.00 हैक्टेयर
6 हरा चारा उत्पादन (चरणबद्ध रूप से) 25.00 हैक्टेयर
7 जैविक खाद निर्माण,(चरणबद्ध रूप से) 5.00 हैक्टेयर
8 गौवंश हेतु – षेड निर्माण व अन्य (चरणबद्ध रूप से 500-500 गौवंश हेतु 10 शेड निर्मित किए जाऐंगे) 25.00 हैक्टेयर
9 तालाब निर्माण व अन्य जल संचयी संरचनाओं हेतु 183.63 हैक्टेयर
कुल भूमि 472.63 हैक्टेयर
कार्य सुविधा की दृष्टि से गौअभ्यारण्य की भूमि को 9 सेक्टरों में विभाजित किया गया है:-
सेक्टर क्रमांक गतिविधि
1 प्रशासनिक खण्ड,ग्रामीण पर्यटन,ग्राम वन एवं हरा चारा
2 गौवंश के शेड व जैविक खाद निर्माण
3,7,8,9 हरा चारा उत्पादन एवं तालाब निर्माण
4,5,6,8 एवं 9 चरणबद्ध रूप से चारागाह विकास एवं वृक्षारोपण

शेड

  1. अभ्यारण्य में प्रतिवर्ष 1000 गौवंश की वृद्धि अनुमानित है।
  2. पाॅच वर्षो में अभ्यारण्य का कुल गौवंश-5000 होगा।
  3. गौवंश हेतु 4 शेड को ईकाई के रूप मे विकसित किया जाएगा। इस ईकाई में 500 गौवंश के आवास की व्यवस्था होगी। इस ईकाई के साथ ही एक कूप व चारा शेड निर्मित किया जाएगा। आगामी पाॅच वर्षो में चरणबद्ध 5000 गौवंश हेतु कुल 10 ईकाईयाॅ निर्मित की जाऐंगी।
  4. 500 गौवंश के आवास एवं चारा गोदाम का निर्माण कार्य प्रचलन में है जो अगस्त माह तक पूर्ण कर लिया जाएगा। इस हेतु राशि म.प्र.गौपालन एवं पशुधन संवर्धन बोर्ड द्वारा प्रदाय की गई है।

अनुसंधान केन्द्र

  1. गौअभ्यारण्य में पाले जा रहे गौवंश से प्राप्त गौ उत्पादों पर शोध कार्य हेतु अनुसंधान केन्द्र की स्थापना की जाएगी।
  2. अनुसंधान केन्द्र (Research Center) 5000 स्क्वायर फीट का होगा। जिसके लिए आवश्यक अधोसंरचना,औजार व मशीनरी का निर्माण किया जाएगा।
  3. केन्द्र के संचालन हेतु आवश्यक पदों का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। अनुसंधान केन्द्र के लिए आवश्यक गौ उत्पादों की पूर्ति जैसे दूध,गोबर,गौमूत्र,जड़ी बूटियाँ इत्यादि अभ्यारण्य में पाले जा रहे गौवंश से की जाएगी।
  4. अनुसंधान केन्द्र का संचालन नानाजी देशमुख पशुचिकित्सा विश्वविद्यालय के मार्गदर्शन में होगा।

उत्पादन केन्द्र

  1. अनुसंधान केन्द्र से समन्वय स्थापित कर किए गए शोध कार्यों से विभिन्न प्रकार की पंचगव्य औषधि, जैविक खाद एवं कीट नियंत्रकों का निर्माण व विपणन किया जाएगा।
  2. उत्पादन केन्द्र 3000 स्कयर फीट का होगा। जिसके लिए आवश्यक औजार व मशीनरी की व्यवस्था की जाएगी।
  3. उत्पादन केन्द्र में विषय विषेषज्ञों की नियुक्ति की जाएगी।
  4. अनुसंधान व उत्पादन केन्द्र साथ-साथ होंगे जिससे उनमें समन्वय हो सके।

ग्रामीण पर्यटन हेतु विकास

  1. अभ्यारण्य के लगभग 10 हैक्टेयर क्षेत्र को ग्रामीण पर्यटन हेतु विकसित किया जाएगा। जिसमें पर्यटक आकर गौआधारित ग्राम की परिकल्पना से परिचित हो सकें। इस पर्यटक स्थल को Zero Emission की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। इस स्थल में परोसे जाने वाले भोजन से लेकर समस्त वस्तुऐं जैविक व प्राकृतिक वस्तुओं से निर्मित होंगी।
  2. इस स्थल के निकट लगभग 02 हैक्टेयर में ग्राम वन लगाया जा सकता है। जिसमें फलदार वृक्ष हो,यह वन इस पर्यटन स्थल को आर्थिक योगदान प्रदान करेगा।
  3. पर्यटन की इस परियोजना का क्रियांन्वयन व संचालन पर्यटन विकास विभाग द्वारा किया जाना प्रस्तावित।