इतिहास

आगर नगर का इतिहास प्रागेतिहासिक काल के आरम्भ से आरम्भ होता है| यहाँ लाल घाटी तथा समीपवर्ती क्षेत्र में गोलाश्म, मध्यप्रदेश व उत्तर-पूर्वाश्म उपकरण प्राप्त होते है | परमार काल में इस क्षेत्र का महत्त्व अक्षुण्य व रेखांकनीय रहा है, जिसके प्रमाण में यहाँ से प्राप्त परमारकालीन प्रतिमाएं है |परमार काल में इसका सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्व था |

आगर मालवा जिले का क्रमबद्ध इतिहास 4000 वर्ष पूर्व के पुरातत्वीय अवशेष मिलने के सांथ आरम्भ होता है| सुसनेर, सोयतकलां, बडागांव आदि ताम्रयुगीन महत्वपूर्ण केंद्र है, इन स्थानों से कायथा संस्कृति के अवशेष मिले हैं | मुगलकाल में जब मांडू मुगलों की राजधानी हुआ करती थी तब यह ग्रीष्म प्रवास की दृष्टि से सर्वाधिक पसंद किया जाने वाला क्षेत्र था, मुग़ल यहाँ गर्मी का समय व्यतीत करने आते थे| यहाँ गर्मी के समय रात्रि का तापमान अन्य क्षेत्रों की तुलना में कम हुआ करता था | “शब-ऐ-मालवा” की प्रसिद्धि इस क्षेत्र की जलवायु के कारण ही है | सिंधिया राज्य के समय इसे अनुविभाग का दर्जा प्राप्त था | उस समय के किले आज भी अस्तित्व में है जिनमे न्यायालय व अन्य प्रशासनिक भवन संचालित है | पूर्व में मध्यभारत राज्य के समय इसे वर्ष १९५६ तक जिले का दर्जा प्राप्त था | १६ अगस्त २०१३ के उपरान्त पुनः इसे जिले का दर्जा प्राप्त हो गया है | जिले में कोई आरक्षित अथवा संरक्षित श्रेणी का वन्य क्षेत्र नहीं है, इस कारण यहाँ कोई विशेष प्रकार के जीव नहीं पाए जाते हैं | सालारिया गौ अभ्यारण जो की सुसनेर क्षेत्र मे स्थित है, उसे प्रदेश के प्रथम गौ अभ्यारण का दर्जा प्राप्त है |